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नार्मल बीपी कितना होना चाहिए ।

नॉर्मल ब्लड प्रेशर रेंज क्या है?

ब्लड प्रेशर शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, जो उच्च और निम्न होने के दो अवस्थाओं में होता है। जब हमारे हृदय धड़कने लगते हैं, तब वे रक्त को शरीर के अंदर पंप करने लगते हैं। इस पंपिंग के दौरान, रक्त की दबाव उत्पन्न होती है जो ब्लड प्रेशर के रूप में जाना जाता है। ब्लड प्रेशर को दो नंबरों में मापा जाता है: सिस्टोलिक और डायस्टोलिक। सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर हमारे हृदय की धड़कन के समय का ब्लड प्रेशर होता है, जबकि डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर हमारे हृदय की धड़कन नहीं होते हुए रक्त के दबाव का माप होता है।

नॉर्मल ब्लड प्रेशर रेंज क्या है?

नॉर्मल ब्लड प्रेशर रेंज व्यक्ति से व्यक्ति भिन्न हो सकता है। आमतौर पर, एक स्वस्थ व्यक्ति का सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 120 से 129 और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर 80 से 84 होता है। इसके अलावा, आमतौर पर ब्लड प्रेशर के रेंज में बदलाव आते रहते हैं।

ब्लड प्रेशर का प्रबंधन कैसे करें 

आज के दौर में ब्लड प्रेशर एक आम समस्या हो गई है। बहुत से लोग इससे पीड़ित होते हैं और उन्हें इसे नियंत्रित करने के लिए जरूरी जानकारी नहीं होती है। लेकिन यह समस्या संभव है नियंत्रण किया जा सकता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि ब्लड प्रेशर का प्रबंधन कैसे करें।

सही खान-पान: खाने की चीजों का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण है। वसा वाली खाद्य पदार्थों से बचें और आहार में फल और सब्जी शामिल करें। अपने आहार में सोडियम की मात्रा कम करें जैसे नमक और सॉडा। इसके साथ ही शराब और नशीली दवाइयों का सेवन भी न करें।

व्यायाम: रोजाना व्यायाम करना ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद कर सकता है। आराम से शुरू करें और धीरे-धीरे अपने शरीर को एक्सरसाइज से अधिक तनाव न दें। योग, चलने जाने में व्यायाम और स्विमिंग जैसी एक्सरसाइज कम करने के लिए उपयोगी होती हैं।

उच्च रक्तचाप के कारण :

उच्च रक्तचाप कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

आहार: अनुचित खान-पान, जैसे अधिक नमक और तेल का सेवन उच्च रक्तचाप के कारण हो सकता है।

वजन: वजन के बढ़ने से उच्च रक्तचाप होने की संभावना बढ़ जाती है।

नपुंसकता: नपुंसकता उच्च रक्तचाप का एक कारण हो सकती है।

स्त्रेस: जीवन में स्ट्रेस का अधिक होना भी उच्च रक्तचाप का कारण हो सकता है।

आप कमेंट सेक्शन में अपने सवाल लिख सकते हैं । मैं जवाब दे दूँगी । 

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मिर्गी या एपिलेप्सी से कैसे बचें ?

एपिलेप्सी एक जीवन बदल देने वाला रोग है, जिसमें व्यक्ति के मस्तिष्क में अनियंत्रित विद्युत् गतिविधियां होती हैं। यह गंभीर समस्या है जो किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन ज्यादातर लोग बचपन में ही इस समस्या से पीड़ित हो जाते हैं। इस लेख में हम एपिलेप्सी के बारे में बात करेंगे जैसे कि यह क्या है, इसके कारण, लक्षण और इसका इलाज।

एपिलेप्सी क्या है?

एपिलेप्सी एक न्यूरोलॉजिकल रोग है जो मस्तिष्क के विद्युत् गतिविधियों में अनियंत्रित गतिविधियों के कारण होता है। इसका मतलब है कि इस रोग में व्यक्ति के मस्तिष्क में अचानक विद्युत् की अनियंत्रित खंडन हो जाती है जो उसके शरीर के कुछ हिस्सों के नियंत्रण को खो देती है। इससे व्यक्ति असंयमित तरीके से हिलता हुआ दिखता है और अधिकतर लोग उन्हें भ्रमित हो जाते हैं।

इस लेख में हम एपिलेप्सी के कारणों के बारे में बात करेंगे

एपिलेप्सी के कारण क्या होते हैं?

एपिलेप्सी के कारण विभिन्न होते हैं, लेकिन इसमें मस्तिष्क के विद्युत् गतिविधियों में अनियंत्रित गतिविधियों के कारण होता है। इस रोग के कुछ मुख्य कारणों के बारे में निम्नलिखित हैं:

उच्च तापमान: उच्च तापमान एपिलेप्सी के लिए एक बड़ा कारक है। लंबी समय तक बारिश न होना, दुष्काल एवं गर्मी या बहुत ठंडी मौसम एपिलेप्सी के लिए जोखिम बनते हैं।

जन्मांग विकार: जन्मांग विकार भी एपिलेप्सी के लिए एक कारक हो सकते हैं। यह विकार जन्म के समय हो सकते हैं या जन्म के पहले और दूसरे तिमाही में हो सकते हैं।


एपिलेप्सी रोग आमतौर पर अचानक आने वाली जटिलताओं के कारण होता है और इससे बचाव करना बहुत मुश्किल होता है। इस लेख में, हम आपको एपिलेप्सी से बचने के कुछ उपायों के बारे में बताएंगे।

स्वस्थ खानपान: स्वस्थ खानपान रखना अत्यंत आवश्यक है। आपको हर दिन अपने आहार में पूर्ण आहार जैसे फल, सब्जियां, अनाज आदि का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा, शराब और अन्य नशीली द्रव्यों का सेवन करने से बचें।

नियमित व्यायाम: नियमित व्यायाम करने से आप एपिलेप्सी से बच सकते हैं। योग, पैदल चलना, जोगिंग, धैर्यवानी, आदि के लिए समय निकालें।

समय पर नींद: समय पर नींद लेना भी बहुत महत्वपूर्ण है। दिन में कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें।

स्ट्रेस से बचें: स्ट्रेस एपिलेप्सी का मुख्य कारण है। समय-समय पर अपने आप को रिलैक्स करें। आप ध्यान विश्राम, मुद्रा, योग, आदि कर सकते हैं।

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What could be the best option for clavicle bone fracture

My sister fallen from scooty and her clavicle bone broken, sir please advice best suitable treatment, is surgery necessary 

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